अवसाद के उपचार के तीन मुख्य प्रकार होते हैं: चिकित्सीय (मेडिकल), मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिकल), और सामाजिक (सोशल)। अवसाद का प्रबंधन आमतौर पर इन उपचारों के संयोजन से किया जाता है:
चिकित्सीय उपचारों में केवल दवाएँ ही नहीं, बल्कि अन्य उपचार विकल्प भी शामिल होते हैं, जो आमतौर पर विशिष्ट केंद्रों में ही लागू किए जाते हैं।
मनोवैज्ञानिक उपचार में मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) या 'बातचीत उपचार' शामिल होता है, जिसके कई सैद्धांतिक और नैदानिक उपप्रकार होते हैं। मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) का उपयोग हल्के अवसाद के मामलों में अकेले किया जा सकता है, जबकि अधिक गंभीर अवसाद के लिए इसे दवा के साथ संयोजन में उपयोग किया जाता है।
माजिक और अन्य हस्तक्षेप भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें सामाजिक गतिविधियाँ, विश्राम रणनीतियाँ, नियमित मध्यम व्यायाम, आवश्यक होने पर चिकित्सीय अवकाश, बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त करना और आत्म-सहायता के तरीके सीखना शामिल हैं। गतिविधियाँ आशा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं, जो दवा और मनोचिकित्सा दोनों के चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाते हैं।
अवसाद का प्रबंधन आमतौर पर प्राथमिक देखभाल में अवसादरोधी दवाओं (एंटीडिप्रेसेंट मेडिकेशन) और संबंधित मनोवैज्ञानिक सेवाओं के लिए रेफरल के माध्यम से किया जाता है। अगले अनुभागों में अवसादरोधी दवाओं और संबंधित सेवाओं के लिए रेफरल प्रबंधन पर अधिक विस्तृत जानकारी दी गई है।